Hindi Shayari

हिंदी में तारीफ़ शायरी

Written by WikiHi

हिंदी में तारीफ़ शायरी | Tareef Shayari in Hindi

Hello Friends, आज के इस पोस्ट में पढेंगे कुछ बेहतरीन हिंदी में तारीफ़ शायरी. हमें पूर्ण आशा है कि आपको ये काफी पसंद आएगी.

तो आइये पढ़ते हैं हिंदी में तारीफ़ शायरी

 

निगाह उठे तो सुबह हो… झुके तो शाम हो जाये,
एक बार मुस्कुरा भर दो तो कत्ले-आम हो जाये।

 

उनकी तारीफ़ क्या पूछते हो उम्र सारी गुनाहों में गुजरी
अब शरीफ बन रहे है वो ऐसे जैसे गंगा नहाये हुए है

 

Ga sakun apka nagma wo saaaz kahan se laun, Suna sakun kuch apko wo andaaz kahan se laun, Yun to chandani ki tarif karna asaan hai, Kar sakun aapki tarif wo alfaaz kahan se laun.

ऐसा ना हो तुझको भी दीवाना बना डाले,
तन्हाई में खुद अपनी तस्वीर न देखा कर।

 

मुझको मालूम नहीं…. हुस़्न की तारीफ,
मेरी नज़रों में हसीन ‘वो’ है, जो तुम जैसा हो, ।

हिंदी में तारीफ़ शायरी | Tareef Shayari in Hindi

 

तुझको देखा तो फिर किसी को नहीं देखा,
चाँद कहता रहा मैं चाँद हूँ… मैं चाँद हूँ…।

 

यू तारीफ ना किया करो मेरी शायरी की
दिल टूट जाता है मेरा जब तुम मेरे दर्द पर वाह-वाह करते हो

 

Apno ki duniya mein hum khote gaye, Hosh mein the fir bhi madhosh hote gaye, Jane kya jadoo tha us ajnabi chahere mein, Khud ko bahut roka fir bhi uske hote gaye..

बचपन में सोचता था चाँद को छू लूँ,
आपको देखा वो ख्वाहिश जाती रही।

 

कैसे बयान करें सादगी अपने महबूब की,
पर्दा हमीं से था मगर नजर भी हमीं पे थी।

 

अब हम समझे तेरे चेहरे पे तिल का मतलब,
हुस्न की दौलत पे दरबान बिठा रखा है

 

तेरी ज़ुल्फ़ों की घटाओं का मुंतज़िर हुआ जाता हूँ,
अब ये आलम है कि बारिश भी सूखी सी लगती है।

 

मिल जाएँगे हमारी भी तारीफ़” करने वाले.
कोई हमारी मौत की “अफ़वाह” तो फैलाओ यारों

 

Hasrat hain sirf tumhey paaney ki, Aur koyi khawahish nahin is deewane ki, Shikwa mujhe tum se nahin khuda se hain, Kya zrurat thi tumhe itna khubsurat bnane ki

कमसिनी का हुस्न था वो… ये जवानी की बहार,
पहले भी तिल था रुख पर मगर क़ातिल न था।

 

तेरे हुस्न पर तारीफ भरी किताब लिख देता…….
काश के तेरी वफ़ा तेरे हुस्न के बराबर होती…….

 

उफ्फ ये नज़ाकत ये शोखियाँ ये तकल्लुफ़,
कहीं तू उर्दू का कोई हसीन लफ्ज़ तो नहीं।

हिंदी में तारीफ़ शायरी | Tareef Shayari in Hindi

 

क्या लिखूँ तेरी सूरत – ए – तारीफ मेँ , मेरे हमदम
अल्फाज खत्म हो गये हैँ, तेरी अदाएँ देख-देख के

 

Khuda ki fursat me ek pal aya hoga, Jab usne ap jese pyare insan ko bnaya hoga, Na jane kounsi dua kubool huyi hamari, Jo usney aap ko humsey milaya hoga…!!!!

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं रात भर,
कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता।

 

!!तेरे …..हुस्न की तपिश….कहीं…जला ना दे
मुझे…….!!!
.
तू कर….महोब्बत मुझसे….ज़रा….आहिस्ता
आहिस्ता..!!!

 

ये आईने ना दे सकेंगे तुझे तेरे हुस्न की खबर,
कभी मेरी आँखों से आकर पूछो के कितनी हसीन हों तुम…!!

 

उसने होठों से छू कर
दरिया का पानी गुलाबी कर दिया,
हमारी तो बात और थी उसने
मछलियों को भी शराबी कर दिया।

 

एक लाइन में क्या तेरी तारीफ़ लिखू

पानी भी जो देखे तुझे तो प्यासा हो जाये

हिंदी में तारीफ़ शायरी | Tareef Shayari in Hindi

 

नहीं भाता अब तेरे सिवा किसी और का चेहरा,
तुझे देखना और देखते रहना दस्तूर बन गया है।

 

शायद तुझे खबर नहीं ए शम्मे-आरजू,
परवाने तेरे हुस्न पे कुरबान गये है….!!

 

खूबसूरती ना सूरत में है, ना लिबास में,
ये निगाहें जिसे चाहे हसीन कर दें।

 

कितना खूबसूरत चेहरा है तुम्हारा,
ये दिल तो बस दीवाना है तुम्हारा,
लोग कहते है चाँद का टुकड़ा तुम्हें,
पर मैं कहता हूँ चाँद भी टुकड़ा है तुम्हारा।

 

तुझको देखेंगे सितारे तो स्याह माँगेंगे,
और प्यासे तेरी ज़ुल्फों से घटा माँगेंगे,
अपने कंधे से दुपट्टे को ना सरकने देना,
वर्ना बूढ़े भी जवानी की दुआ माँगेंगे।

 

ये इश्क़ बनाने वाले की मैं तारीफ करता हूं

मौत भी हो जाती है और क़ातिल भी पकड़ा नही जाता

हिंदी में तारीफ़ शायरी | Tareef Shayari in Hindi

 

इस डर से कभी गौर से देखा नहीं तुझको​,​
​​कहते हैं कि लग जाती है अपनों की नज़र भी​।

 

क्यों चाँदनी रातों में दरिया पे नहाते हो,
सोये हुए पानी में क्या आग लगानी है।

 

तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,,
कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद…

 

तेरे हुस्न का दीवाना तो हर कोई होगा
लेकिन मेरे जैसी दीवानगी हर किसी में नहीं होगी।

 

वो शरमाई सूरत वो नीची निगाहें,
वो भूले से उनका इधर देख लेना।

 

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा,
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं।

 

सभी तारीफ करते हैं, मेरी शायरी की लेकिन

कभी कोई सुनता नहीं, मेरे अल्फाज़ो की सिसकियाँ.

 

ये दिलबरी, ये नाज़, ये अंदाज़, ये जमाल,
इंसान करे अगर न तेरी चाह… क्या करे।

हिंदी में तारीफ़ शायरी | Tareef Shayari in Hindi

 

हुस्न की ये इन्तेहाँ नहीं है तो और क्या है,
चाँद को देखा है हथेली पे आफताब लिए हुए।

 

तारीफ़ अपने आप की, करना फ़िज़ूल है,

ख़ुशबू तो ख़ुद ही बता देती है, कौन सा फ़ूल है

 

लोग भले ही मेरी शायरी की तारीफ न करे

खुशी दुगनी होती है जब उसे कॉपी पेस्ट में देखता हूं

 

तेरी तारीफ मेरी शायरी में जब हो जाएगी

चाँद की भी कदर कम हो जाएगी

 

ये तेरा हुस्न औ कमबख्त अदायें तेरी
कौन ना मर जाय,अब देख कर तुम्हें.

 

तेरा हुस्न एक जवाब,मेरा इश्क एक सवाल ही सही
तेरे मिलने कि ख़ुशी नही,तुझसे दुरी का मलाल ही सही
तू न जान हाल इस दिल का,कोई बात नही
तू नही जिंदगी मे तो तेरा ख़याल ही सही

 

क्या तुझे कहूं तू है मरहबा.
तेरा हुस्न जैसे है मयकदा
मेरी मयकशी का सुरूर है,
तेरी हर नजर तेरी हर अदा_

 

किसका चेहरा अब मैं देखूं…?

चाँद भी देखा…! फूल भी देखा…!!
बादल बिजली…! तितली जुगनूं…!!
कोई नहीं है ऐसा…! तेरा हुस्न है जैसा…!!

हिंदी में तारीफ़ शायरी | Tareef Shayari in Hindi

 

तेरी तरफ जो नजर उठी
वो तापिशे हुस्न से जल गयी
तुझे देख सकता नहीं कोई
तेरा हुस्न खुद ही नकाब हैं

 

तेरा हुस्न जब से मेरी आँखों में समाया है,
मेरी पलकों पे एक सुरूर सा छाया है,
मेरे चेहरे को हसीन नूर देने वाले,
ये तेरे दीदार के लम्हों का सरमाया है!

 

सोचता हु हर कागज पे तेरी तारीफ करु, फिर खयाल आया कहीँ पढ़ने वाला भी तेरा दीवाना ना हो जाए।

 

ये सोचकर रोक लेता हूँ कलम को, तेरी
तारीफ लिखते लिखते,.. की कहीं इन
लफ़्ज़ों को सबसे बेहतरीन .. होने का गुमान
ना हो जाये

 

उसने तारीफ़ ही कुछ इस अंदाज से की मेरी,

अपनी ही तस्वीर को सौ दफ़े देखा मैंने!!

 

ना चाहते हुए भी आ जाता हैं लबों पे
तेरा नाम…….
~
~
कभी तेरी तारीफ में तो कभी तेरी
शिकायत में……..!!

 

चाँद की चाँदनी हो तुम.. तारो की रोशनी हो तुम..

सुबह की लाली हो तुम… मेरे दिल में बसी हुई एक आशिक़ी हो तुम

 

मुझको मालूम नहीं हुस़्न की तारीफ,

मेरी नज़रों में हसीन ‘वो’ है, जो तुम जैसा हो,

 

 

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