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Kabir Ke Dohe | Sabhi Dohe Ek Post Me

Kabir Ke Dohe | Sabhi Dohe Ek Post Me
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Hi Friends, Kabir Das Ke Dohe Aaj Kar Kafi Prachalit Hain Aur Unhe Log Internet Par Search Karke Padhna Pasand Karte Hain. Is Liye Main Is Post Me Aap Sabhi Ko Kabir Das Ke Kuchh Dohe Aur Unke Arth Hindi Aur Hinglish Me Dene Ja Raha Hun Taki Aap Ise Padhkar Inka Fayda Utha Saken.

Ye Post Me Kabir Das Ke Dohe Ka Sangrah Payenge Hindi Aur Hinglish Dono Me.

Mujhe Aasha Hai Ki Aap In Kabir Dohe Ko Pasand Karenge ~

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Kabir Dohe in Hindi with Meaning

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।

Meaning : Jab Main Is Sansar Me Burai Khojne Chala To Mujhe Koi Bura Na Mila. Jab Maine Apne Man Me Jhank-Kar Dekha Toa Paya Ki Mujhse Bura Koi Nahi Hai.

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।

Meaning : Man Me Dheeraj Rakhne Se Sabkuchh Hota Hai, Agar Koi Koi Maali Apne Ped Ko Sau Ghade Paani Se Sichne Lage Tab Bhi Phal Ritu Aane Par Hi Lagega.

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।

Meaning : Koi Vayakti Lambe Samay Tak Haath Me Lekar Moti Ka Mala Lekar Ghumata Hai Lekin Uska Man Nahi Badalta Hai, Agar Wo Apne Man Ki Motiyon Ko Ghumane Lage To Use Jarur Shanti Milegi.

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

Meaning : Sajjan Ki Jati Na Puchhkar Unse Unka Gyan Puchhna Chahiye, Kyonki Mulya Talwar Ka Hota Hai Na Ki Uske Myan Ki.

दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त,
अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत।

Meaning : Manushy Dusre Ke Dosh Ko Dekhkar Hansta Hai, Lekin Jab Wo Apne Dosh Ko Yaad Kare To Uska Koi Ant Nahi Hai.

Kabir Ke Dohe | Sabhi Dohe Ek Post Me

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ,
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।

Meaning : Jo Praytn Karte Hain, Ve Kuchh Na Kuchh Vaise Hi Paa Lete Hain Jaise Koi Mehnat Karne Bala Gotakhor Gahre Pani Me Jakar Kuchh Na Kuchh Le Hi Aata Hai Lekin Kuchh Log Dubne Ke Bhay Se Kinare Par Hi Baithe Rahte Hain Aur Kuchh Nahi Paate.

बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।

Meaning : Jo Koi Vayakti Ye Janta Hai Ki Boli Ek Amuly Ratn Hai, Wo Use Hirday Ki Taraju Me Taulkar Hi Bahar Aane Deta Hai.

रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय ।
हीरा जन्म अमोल सा, कोड़ी बदले जाय ॥

Meaning : Raat Ko Sone Me Bita Diya, Din Ko Khane Me. Is Heera Jaise Amuly Jeevan Ko Kaudi Ke Saman Vyarth Kar Diya.

बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।

पंछी को छाया नहीं फल लागे अति दूर ॥

Meaning : Khajur Ke Saman Bada Hone Se Kya Fayda Agar Wo Sahi Se Panchhi Ko Chhav Nahi De Pata Hai Aur Uske Fal Bhi Kafi Dur Lagte Hain.

Kabir Ke Dohe | Sabhi Dohe Ek Post Me

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप,
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।

Meaning : Jarurat Se Adhik Na To Bolna Achha Hota Hai Aur Na Jarurat Se Kam Bolna. Thik Usi Tarah Jaise Na To Adhik Varsha Achhi Hoti Hai Aur Na Hi Adhik Dhup.

निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय,
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।

Meaning : Jo Hamari Ninda Karte Hain Unke Hamesha Kareeb Rahna Chahiye. Ve To Bina Pani Aur Sabun Ke Hamari Kamiyan Batakar Hamare Swabhav Ko Saaf Karte Hain.

जब गुण को गाहक मिले, तब गुण लाख बिकाई.

जब गुण को गाहक नहीं, तब कौड़ी बदले जाई.

Meaning : Jab Kisi Gun Kar Grahak Mil Jata Hai To Wo Lakhon Me Bik Jaati Hai, Lekin Jab Usi Gun Ka Grahak Nahi Mil Paata Hai, To Ye Kaudi Ke Bhav Bik Jaati Hai.

कबीर कहा गरबियो, काल गहे कर केस.
ना जाने कहाँ मारिसी, कै घर कै परदेस.

Kabir Kahte Hain Ki Ham Sabhi Ka Kesh Kaal Ke Haat Me Hai, Pata Nahi Wo Kab Hame Desh Ya Pardesh Me Maar Daale.

पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात.
एक दिना छिप जाएगा,ज्यों तारा परभात.

Meaning : Manushy Ka Sharir Paani Ke Bulbule Ke Saman Hai, Ek Din Ye Thik Usi Tarah Nasht Ho Jayegi Jaise Taare Chhipte Hi Subah Ho Jaati Hai.

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हाड़ जलै ज्यूं लाकड़ी, केस जलै ज्यूं घास.
सब तन जलता देखि करि, भया कबीर उदास.

Meaning : Yah Manav Deha Ant Me Lakdi Ki Tarah Jal Jati Hai Aur Kesh Ghas Ki Tarah Jal Jati Hai. Is Tarah Pure Sharir Ko Jalta Dekh Kabir Das Udas Ho Jate Hain.

जो उग्या सो अन्तबै, फूल्या सो कुमलाहीं।

जो चिनिया सो ढही पड़े, जो आया सो जाहीं।

Meaning : Is Sansar Ka Niyam Hai Ki Jo Uga Hai Wo Ast Hoga, Jo Viksit Hua Hai Wo Murjha Jayega, Jo China Gaya Hai Wo Gir Jayega Aur Jo Aaya Hai Wo Jayega.

झूठे सुख को सुख कहे, मानत है मन मोद.

खलक चबैना काल का, कुछ मुंह में कुछ गोद.

Meaning : Kabir Kahte Hain Hain Ki Vayakti Jhute Sukh Ko Sukh Kahkar Apne Aap Me Khus Hota Rahta Hai, Ham Sabhi Mirtu Ke Us Bhojan Ke Saman Hai Jo Kuchh Uske Muh Me Hai Aur Kuchh Uske God Me Khane Ke Liye Rakha Hai.

ऐसा कोई ना मिले, हमको दे उपदेस.

भौ सागर में डूबता, कर गहि काढै केस.

अर्थ : कबीर संसारी जनों के लिए दुखित होते हुए कहते हैं कि इन्हें कोई ऐसा पथप्रदर्शक न मिला जो उपदेश देता और संसार सागर में डूबते हुए इन प्राणियों को अपने हाथों से केश पकड़ कर निकाल लेता. —

संत ना छाडै संतई, जो कोटिक मिले असंत

चन्दन भुवंगा बैठिया, तऊ सीतलता न तजंत।

अर्थ : सज्जन को चाहे करोड़ों दुष्ट पुरुष मिलें फिर भी वह अपने भले स्वभाव को नहीं छोड़ता. चन्दन के पेड़ से सांप लिपटे रहते हैं, पर वह अपनी शीतलता नहीं छोड़ता.

कबीर तन पंछी भया, जहां मन तहां उडी जाइ.

जो जैसी संगती कर, सो तैसा ही फल पाइ.

अर्थ :कबीर कहते हैं कि संसारी व्यक्ति का शरीर पक्षी बन गया है और जहां उसका मन होता है, शरीर उड़कर वहीं पहुँच जाता है। सच है कि जो जैसा साथ करता है, वह वैसा ही फल पाता है.

Kabir Ke Dohe | Sabhi Dohe Ek Post Me

तन को जोगी सब करें, मन को बिरला कोई.

सब सिद्धि सहजे पाइए, जे मन जोगी होइ.

अर्थ : शरीर में भगवे वस्त्र धारण करना सरल है, पर मन को योगी बनाना बिरले ही व्यक्तियों का काम है य़दि मन योगी हो जाए तो सारी सिद्धियाँ सहज ही प्राप्त हो जाती हैं.

दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार,
तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार।

अर्थ : इस संसार में मनुष्य का जन्म मुश्किल से मिलता है. यह मानव शरीर उसी तरह बार-बार नहीं मिलता जैसे वृक्ष से पत्ता झड़ जाए तो दोबारा डाल पर नहीं
लगता.

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती,न काहू से बैर.

अर्थ : इस संसार में आकर कबीर अपने जीवन में बस यही चाहते हैं कि सबका भला हो और संसार में यदि किसी से दोस्ती नहीं तो दुश्मनी भी न हो !

हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम न कोउ जाना।

अर्थ : कबीर कहते हैं कि हिन्दू राम के भक्त हैं और तुर्क (मुस्लिम) को रहमान प्यारा है. इसी बात पर दोनों लड़-लड़ कर मौत के मुंह में जा पहुंचे, तब भी दोनों में से कोई सच को न जान पाया।

कहत सुनत सब दिन गए, उरझि न सुरझ्या मन.

कही कबीर चेत्या नहीं, अजहूँ सो पहला दिन.

अर्थ : कहते सुनते सब दिन निकल गए, पर यह मन उलझ कर न सुलझ पाया. कबीर कहते हैं कि अब भी यह मन होश में नहीं आता. आज भी इसकी अवस्था पहले दिन के समान ही है.

कबीर लहरि समंद की, मोती बिखरे आई.

बगुला भेद न जानई, हंसा चुनी-चुनी खाई.

अर्थ :कबीर कहते हैं कि समुद्र की लहर में मोती आकर बिखर गए. बगुला उनका भेद नहीं जानता, परन्तु हंस उन्हें चुन-चुन कर खा रहा है. इसका अर्थ यह है कि किसी भी वस्तु का महत्व जानकार ही जानता है।

कबीर सो धन संचे, जो आगे को होय.

सीस चढ़ाए पोटली, ले जात न देख्यो कोय.

अर्थ : कबीर कहते हैं कि उस धन को इकट्ठा करो जो भविष्य में काम आए. सर पर धन की गठरी बाँध कर ले जाते तो किसी को नहीं देखा.

Kabir Ke Dohe | Sabhi Dohe Ek Post Me

माया मुई न मन मुआ, मरी मरी गया सरीर.

आसा त्रिसना न मुई, यों कही गए कबीर .

अर्थ : कबीर कहते हैं कि संसार में रहते हुए न माया मरती है न मन. शरीर न जाने कितनी बार मर चुका पर मनुष्य की आशा और तृष्णा कभी नहीं मरती, कबीर ऐसा कई बार कह चुके हैं.

साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,
सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।

अर्थ : इस संसार में ऐसे सज्जनों की जरूरत है जैसे अनाज साफ़ करने वाला सूप होता है. जो सार्थक को बचा लेंगे और निरर्थक को उड़ा देंगे.

तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय,
कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।

अर्थ : कबीर कहते हैं कि एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा न करो जो तुम्हारे पांवों के नीचे दब जाता है. यदि कभी वह तिनका उड़कर आँख में आ गिरे तो कितनी गहरी पीड़ा होती है !

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