Hindi Shayari

हिंदी में शिक़वा शायरी

Written by WikiHi

हिंदी में शिक़वा शायरी | Shikwa Shayari in Hindi

Hello Friends, आज के इस पोस्ट में आप सभी को दी जा रही है कुछ बेहतरीन हिंदी में शिक़वा शायरी अर्थात Shikwa Shayari in Hindi ताकि आप इसे पढ़ सकें और भेज सकें उन लोगों को जिनको इनकी जरुरत हो. तो आइये पढ़ते हैं हिंदी में शिक़वा शायरी.

Shikwa Shayari in Hindi

औरों से कहा तुमने… औरों से सुना तुमने,
कभी हमसे कहा होता कभी हमसे सुना होता।

 

दिल से दूर जिन्हें हम कर ना सके;
पास भी उन्हें हम कभी पा ना सके;
मिटा दिया प्यार जिसने हमारे दिल से;
हम उनका नाम लिख कर भी मिटा ना सके।
Main so jaaunga khamosh yoon hi bhookh aur pyaas se
Aye ameeron agar hai gila tumko mere libaas se.
Jhooti Tasaliyon Ki Zaroorat Nahi Mujhe,
Keh Do K Mere Liye Fursat Nahi Tujhe,
Ye Bhi Nahi K Main Tumhein Ilzaam De Sakoon,
Ye Bhi Nahi K Tum Se Shikayat Nahi Mujhe,
Main Bhi Tumhari Yaad Ko Dil Se Bhula To Doon,
Par Kya Karoon Bewafai Ki Aadat Nahi Mujhe..

शिकवा तो एक छेड़ है लेकिन हकीकतन

तेरा सितम भी तेरी इनायत से कम नहीं।

हिंदी में शिक़वा शायरी | Shikwa Shayari in Hindi

 

शिक़वा वो भी करते हैं शिकायत हम भी करते हैं,

मुहोब्बत वो भी करते हैं मुहोब्बत हम भी करते हैं।

 

Thokr Na Laga Mujhy Pathar Nhi Hoon Main Hairt Sy Na Dikh Mujhy Manzar Nhi Hoon Main Teri Nazaro Mein Meri Kader Kuch Bhi Nahi Mgr Un Sy Puch Jinhein Haasil Nhi..!!!

 

लोग कहते हैं की बदनामी से बचना चाहिए,
कह दो बे इस के जवानी का मज़ा मिलता नही!
~ अकबर अल्लहाबाडी

 

रिश्ता नहीं रखना तो हम पर नज़र क्यों रखते हो,
जिन्दा हैं या मर गए तुम ये खबर क्यों रखते हो..?

 

मैंने रब से कहा वो छोड़ के चली गई;
पता नहीं उसकी क्या मजबूरी थी;
रब ने कहा इसमें उसका कोई कसूर नहीं;
यह कहानी तो मैंने लिखी ही अधूरी थी।
तुझे मोहब्बत करना नहीं आता;
मुझे मोहब्बत के सिवा कुछ आता नहीं;
ज़िंदगी गुज़ारने के दो ही तरीके हैं;
एक तुझे नहीं आता, एक मुझे नहीं आता!
Yeh nahi gham ke kasam apni bhulayi tumne
Gham to yeh hai ki raqeebon se nibhai tumne
Koyi ranjish thi agar tumko to mujhse kehte
Baat aapas ki kyun sabko batayi tumne
Fir Wahi Fasaana Afsaana Sunaati Ho
Dil Ke Paas Hoon Kah Kar Dil Jalati Ho
Beqaraar Hai Aatish E Nazar Se Milne Ko
To Fir Kyon Nahi Pyaar Jataati Ho…

हिंदी में शिक़वा शायरी | Shikwa Shayari in Hindi

 

आप नाराज़ हों, रूठे, के ख़फ़ा हो जाएँ,

बात इतनी भी ना बिगड़े कि जुदा हो जाएँ !!

 

हमारे चले जाने के बाद यह समंदर की रेत भी तुमसे पूछा करेगी,
कहाँ चला गेया वो शख्स जो तन्हाई में आ कर बस तुम्हारा ही नाम लिखा करता था

 

तुम मेरे लिए अब कोई इल्जाम न ढूँढो,
चाहा था तुम्हें एक यही इल्जाम बहुत है।

 

कोई जुदा हो गया कोई ख़फ़ा हो गया;
यह दुनिया के लोगों को क्या हो गया;
जिस सजदे में मुझे उस को माँगना था रब से;
अफ़सोस वही सजदा क़ज़ा हो गया।

हो जाते हो बरहम भी बन जाते हो हमदम भी

ऐ साकी-ए-मयखाना शोला भी हो,शबनम भी

खाली मेरा पैमाना बस इतनी शिकायत है -हसरत जयपुरी

 

मेरी चाहत का सर-ए-आम तो चर्चा ना करो,
कम तो पहले भी नहीं और तो रुसवा ना करो!
~ फख़ीरा बातूल

 

किरदार की अज़मत को गिरने न दिया हमने,
धोखे तो बहुत खाए लेकिन धोखा न दिया हमने।

 

एक ग़ज़ल तेरे लिए ज़रूर लिखूंगा;
बे-हिसाब उस में तेरा कसूर लिखूंगा;
टूट गए बचपन के तेरे सारे खिलौने;
अब दिलों से खेलना तेरा दस्तूर लिखूंगा।
दिल से रोए मगर होंठों से मुस्कुरा बैठे,
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बैठे,
वो हूमें एक लम्हा ना दे पाए अपने प्यार का,
और हम उनके लिए अपनी ज़िंदगी लूटा बैठे!

दिल पे बोझ लेकर तू मुलाकात को न आ,
मिलना है इस तरह तो बिछड़ना कबूल है।

हिंदी में शिक़वा शायरी | Shikwa Shayari in Hindi

 

वो रास्ते में पलटा तो रुक गया मैं भी;
फिर कदम, कदम न रहे, सफर, सफर न रहा;
नज़रों से गिराया उसको कुछ इस तरह हम ने;
कि वो खुद अपनी नज़रों में मुताबिर न रहा।

जिन्दगी से तो खैर शिकवा था

मुद्दतों मौत ने भी तरसाया।

 

दुनिया न जीत पाओ तो हारो न खुद को तुम

थोड़ी बहुत तो ज़हन मे नाराज़गी रहे !! -निदा फ़ाजली

 

ले दे के अपने पास फ़ाक़ात एक नज़र तो है,
क्यों देखे ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम!
~ साहिर लुधियानवी

 

सपना हैं आँखों में मगर नींद नहीं है;
दिल तो है जिस्म में मगर धड़कन नहीं है;
कैसे बयाँ करें हम अपना हाल-ए-दिल;
जी तो रहें हैं मगर ये ज़िंदगी नहीं है।

तुझसे नाराज़ नहीं जिंदगी हैरान हु में….!-

तेरे मासूम सवालों से परेशां हूँ में ..~गुलज़ार

 

इश्क़ का बटवारा रज़ामंदी से हुआ,
चमक उन्होने बटोरी तन्हाई हम ले आए!

 

जाने दुनिया में ऐसा क्यों होता है,
जो सबको खुशी दे वही क्यों रोता है,
उम्र भर जो साथ न दे सके,
वही ज़िन्दगी का पहला प्यार क्यों होता है?

 

ज़िंदगी हमारी यूँ सितम हो गयी;
ख़ुशी ना जाने कहाँ दफ़न हो गयी;
बहुत लिखी खुदा ने लोगों की मोहब्बत;
जब आयी हमारी बारी तो स्याही ही ख़त्म हो गयी।

हिंदी में शिक़वा शायरी | Shikwa Shayari in Hindi

 

शिकवा कोई दरिया की रवानी से नहीं है,

रिश्ता ही मेरी प्यास का पानी से नहीं है !!

 

कितना बदलू खुद को तेरे लिए,
कुछ तो मेरे अंदर मेरा रहने दे!

 

लगा कर आग सीने में चले हो तुम कहाँ;
अभी तो राख उड़ने दो तमाशा और भी होगा!

 

तुम बस उलझे रह गए हमें आजमाने में,
और हम हद से गुजर गए तुम्हें चाहने में।

 

जब प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते;
ख़त किसलिए रखे हैं जला क्यों नहीं देते;
किस वास्ते लिखा है हथेली पे मेरा नाम;
मैं हर्फ़ ग़लत हूँ तो मिटा क्यों नहीं देते।

अब्र-ए-आवारा से मुझको है वफ़ा की उम्मीद

बर्क-ए-बेताब से शिकवा है के पाइंदा नहीं

 

उसे ज़िद कि ‘वामिक़’-ए-शिकवा-गर किसी राज़ से नहो बा-ख़बर

मुझे नाज़ है कि ये दीदा-वार मिरी उम्र भर की तलाश है

 

अब कौन से मौसम से कोई आस लगाए;
बरसात में भी याद ना जब उन को हम आए!

 

वो मोहब्बत भी तेरी थी, वो नफ़रत भी तेरी थी;
वो अपनापन और ठुकराने की अदा भी तेरी थी;
हम अपनी वफ़ा का इंसाफ़ किससे माँगते,
वो शहर भी तेरा था और अदालत भी तेरी थी!

 

गर जिंदगी में मिल गए फिर इत्तेफाक से,
पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम।

 

मोहब्बत का मेरा यह सफर आख़िरी है;
ये कागज, ये कलम, ये गजल आख़िरी है;
फिर ना मिलेंगे अब तुमसे हम कभी;
क्योंकि तेरे दर्द का अब ये सितम आख़िरी है।
दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे!
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे!
वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का!
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे!

तुम को नाराज़ ही रहना है तो कुछ बात करो ‘फ़राज़’,

चुप रहते हो तो मुहब्बत का गुमान होता है !!

 

तेरी उम्मीद तेरा इन्तज़ार कब से है,

ना शब् को दिन से शिकायत ना दिन को शब् से है।

~फैज़

 

राख से भी आएगी खुशबू मोहब्बत की,
मेरे खत तुम सरेआम जलाया ना करो।

 

मोहब्बत नहीं है कोई किताबों की बाते!
समझोगे जब रो कर कुछ काटोगे रातें!
जो चोरी हो गया तो पता चला दिल था हमारा!
करते थे हम भी कभी किताबों की बाते!

हिंदी में शिक़वा शायरी | Shikwa Shayari in Hindi

 

हुस्न और इश्क का हर नाज़ है पर्दे में अभी,

अपनी नजरों की शिकायत किसे पेश करूं

 

हमसे प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते,
खत किसलिए रखे हैं जला क्यों नहीं देते,
किस वास्ते लिखा है हथेली पर मेरा नाम,
मैं हर्फ़ गलत हूँ तो मिटा क्यों नहीं देते।

 

इंतज़ार करते करते वक़्त क्यों गुजरता नहीं!
सब हैं यहाँ मगर कोई अपना नहीं!
दूर नहीं पर फिर भी वो पास नहीं!
है दिल में कहीं पर आँखों से दूर कहीं!

हम को पहले भी न मिलने की शिकायत कब थी

अब जो है तर्क-ए-मरासिम का बहाना हम से

 

हर शाम कह जाती है एक कहानी !
हर सुबह ले आती है एक नई कहानी !
रास्ते तो बदलते है हर दिन लेकिन !
मंजिल रह जाती है वही पुरानी !
हमसफर कोई होता तो
हम भी बाँट लेते दूरियाँ,
राह चलते लोग भला
क्या समझेंगे मेरी मजबूरियाँ।
भूल गए या, भुलाना चाहते हो?
दूर कर दिया, या जाना चाहते हो?
आजमा लिया, या आजमाना चाहते हो?
मैसेज कर रहे हो या अभी और पैसे बचाना चाहते हो?

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